Abhootpoorv Kavi Page 3
अभूतपूर्व कवि पृष्ठ 3/7 कभी-कभी मैं झुक जाता, तो एक-आध टमाटर आयोजक (जो मेरे पीछे बैठा था) तक भी पहुँच जाता। आयोजक, जो अपनी गलती पर पछता रहा था, सामने आने से घबरा रहा था मैं, उसके एहसान का बदला चुका रहा था, अपने हिस्से के टमाटर उस तक पहुंचा रहा था। जब स्टेज टमाटरों […]
Abhootpoorv kavi page 2
अभूतपूर्व कवि पृष्ठ 2/7 तूफान के आसार थे, बादल घिर रहे थे, मुर्झाए, सुस्ताए सर भी अब बखूब फिर रहे थे। मैंने सोचा इस शोरगुल में तो सब जाग जाएंगे, और इस मनहूस की हालत के लिए मुझे ही दोषी ठहराएंगे। इनका ध्यान बाँटने का प्रयत्न करना चाहिए इन्हें खुश करने का, कोई यत्न करना […]
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Page 1: Start of Poem Yeh kavita ka pehla bhaag hai. Bahut hi mazakiya hai! वेटर मियाँ शादी के कुछ दिन बाद हिम्मत कर मैंने कहा अपनी पत्नी से – आज फिर हो जाए कुछ खाना… वो लजाई, थोड़ा मुस्कुराई, फिर बोली – “फिल्मी कि ग़ैर-फिल्मी?” उत्तर से मैं चौंका, फिर भी शॉक को दबाए […]
परफेक्ट पति
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