Grihasth Ashram Page 2
गृहस्थ आश्रम पृष्ठ 2/20 अध्याय 1 – बीवी को पत्र तुम थीं घर में तो कुछ कायदा,क़ानून था। चाहे दूध वाले का साल से पेंडिंग हनीमून था। फिर भी वह तुम्हें इज़हार न कर सका। ले जा कर गवालन को पहाड़ पर, प्यार कर न सका। तुम्हारे जाते ही वो उल्लू चला गया है। लगता […]
Allergy Test Page 3
एलर्जी टेस्ट पृष्ठ 3/3 उस डॉक्टर से मैं जा कर, पता लगाना चाहता हूँ,कि इन चीज़ों को हाथ लगा कर, अगर मेरी पत्नी मरेगी,तो मेरे घर का काम क्या, उस साले की माँ करेगी? न जाने कहाँ कहाँ से, डिगरियाँ ले ले कर आ जाते हैं,जेबें भी काटते हैं और, ऊपर से अजीब अजीब ऐलर्जियाँ […]
Allergy Test Page 2
एलर्जी टेस्ट पृष्ठ 2/3 दरअसल रहना तो तुम वहीं चाहती हो। यहाँ तो बस चन्दा लेने आती हो। और हम उल्लू बस यूँ ही जिए जा रहे हैं। अपनी मेहनत की कमाई चंदे में दिए जा रहे हैं,उस पत्नी को जो किसी डॉक्टर को पटाकर,आती है घर यह लिखवा कर,कि उसे हम से एलर्जी है। […]
Moonchh Page 4
मूँछ पृष्ठ 4/4 फिर भी छींको अगर एकान्त में “सर”, तो ही रहेगा बेहतर, कहीं कोई खड़ा हो देखता सर पर, और मूँछ आ गिरे रुमाल पर। और इस से पहले कि तुम उसे वापिस लगा लो, दर्शक बोले, भाईसाहब अपनी मूँछ सम्भालो। बस फिर आजीवन पछताओगे, नकली हो या असली, नकली वाले ही जाने […]
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मूँछ पृष्ठ 2/4 कैसे होंगे प्रसन्न भला हम, तुम्हें कैसे अब समझाए। तुम रहो व्यस्त काम में, और मूँछों के बल खुल जाए। मेरी मानो तो काम से कर लो बिल्कुल किनारा, “कम टुमौरो ही कह दिया करो, और मूँछ मरोड़ा करो दिन सारा।” देते हैं हम राय एक, और अधिक दिन न टालो, कैसे […]
Moonchh Page 3
मूँछ पृष्ठ 3/4 कहाँ रोज रोज फिर सुबह सवेर, करनी पड़ती इन की “केयर”. जब आफिस को होती हो देर, साथ ही पत्नी का लेक्चर चलता हो। कहाँ संवरती हैं मूँछें, गुस्से में जब मन जलता हो। हर वक्त यही लगता है डर, कहीं खुद से ही न चिढ़ कर, कर दो न क्रूर प्रहार […]
Abhootpoorv Kavi page 7
अभूतपूर्व कवि- पृष्ठ 7/7 सोच लो, यदि वह आ गईं, तो उन्हें कैसे मनाओगे? उसे चुप कराने के लिए, सब्ज़ी कहाँ से लाओगे? इतने में, चार श्रोताओं ने, मुझे उठाया, और पंडाल से बाहर खड़ा कर दिया, और हाथ जोड़ कर कहा, कृपया आप यहाँ से जाएँ, और अपनी कविता कहीं और जाकर सुनाएँ। मैंने […]
Abhootpoorv Kavi Page 6
अभूतपूर्व कवि – पृष्ठ 6/7 इतने छोटे टमाटर देख कर, कोई भी चुप कर जाता, वो तो हम ही हैं जो कहे जा रहे हैं। सरासर नाइंसाफी हो रही है, फिर भी चुप रह कर सहे जा रहे हैं। और फिर देखिए न, अभी कुल मिला कर, पाव भर टमाटर तो मिले नहीं। यदि आप […]
Abhootpoorv Kavi Page 5
अभूतपूर्व कवि – पृष्ठ 5/7 मैं झूठ नहीं कहता, आज भी मैं खाली हाथ नहीं आया हूँ, कलेक्शन के लिए टोकरी साथ लाया हूँ। इसलिए आप न सोचिए–विचारिए, जितना जी में आए टमाटर मारिए। बस इतनी कृपा कीजिए, मेरी राय लीजिए, हो सके तो कभी कुछ और भी चुन लीजिए। आखिर हम भी इंसान हैं, […]
Abhootpoorv Kavi Page 4
अभूतपूर्व कवि पृष्ठ 4/7 टमाटर तो क्या, बच्चे, जब अण्डे खाना चाहते हैं, तो हम किसी कवि सम्मेलन में, बिन बुलाए ही पहुँच जाते हैं। स्टेज पर चढ़ते हैं,अण्डे जब पड़ते हैं, तो हम कलैक्ट कर लेते हैं। घर ले जाते हैं फिर उन्हें और, ऑमलेट और फ्राइड ऐग्ज़, बना-बना कर खाते हैं। बच्चे तो […]