मोती

मोती
(Revised & Polished Version – Navneet Kumar, August 1987)
1.
बिखरे शब्दों के मोती—
पास यदि तुम मेरे होती,
माला पिरोती।
मैं चुन–चुन कर देता मोती
मेरे शब्दों के उर में,
जलती प्रेम की ज्योति।
2.
मोती संजोए जाते,…

मोती
(Revised & Polished Version – Navneet Kumar, August 1987)
1.
बिखरे शब्दों के मोती—
पास यदि तुम मेरे होती,
माला पिरोती।
मैं चुन–चुन कर देता मोती
मेरे शब्दों के उर में,
जलती प्रेम की ज्योति।
2.
मोती संजोए जाते,…