ईश्वर की पहचान

ईश्वर की पहचान यूँ चला हत्याओं का दौर कुछ— ज़िन्दगी घबराने लगी; धर्म, जाति, कुल, वंश— सबमें मृत्यु नज़र आने लगी। मनुष्य, मनुष्यता का कत्ल कर के वीर कहलाने लगा; इंसान को इंसान में दैत्य नज़र आने लगा। मेरी आत्मा रोई— आँसू टपका न सकी; सभी अपने ही से लगे— कौन भिन्न था, बता न […]