प्रेम- प्रसंगी कविताएँ
प्रेम जीवन का सबसे कोमल, गहन और जटिल अनुभव है। इन कविताओं में कभी मिलन की मिठास है, तो कहीं वियोग की वेदना। भावनाओं की गहराई, नज़रों की भाषा, और मन की उलझनों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास है यह संकलन।
यह अनुभूति केवल प्रेमी-प्रेमिका तक सीमित नहीं, बल्कि उस भाव तक है जो आत्मा को छू जाए — एक नजर, एक चुप्पी, एक अधूरी बात।
इन कविताओं में आपको प्रेम के विविध रंग मिलेंगे — सरल, संकोच भरे, उत्कंठा से भरे और कभी-कभी वेदना में डूबे हुए।
झलकियाँ

मोती
“मोती” (1987) — प्रेम, वर्षा, स्पर्श और स्मृति के कोमल बिंबों से रचा एक खूबसूरत प्रेम–गीत; जिसमें शब्द मोतियों की तरह पिरो कर उभरते हैं।
Aam Nahin Hai Yeh Rishta Hamara Page 1
आम नहीं है यह रिश्ता हमारा पृष्ठ- 1 आम नहीं हा यह रिश्ता हमारा । मैंने कहा जानती हो तुम भी तो, कि आम नहीं
Hari Shawl Odhe
हरी शॉल ओढ़े पृष्ठ- 1 “मेरे लिए तो ज़िन्दगी उसी दिन ठहर गई थी तुम मुझे छोड़ के जिस दिन, जिस पहर गई थी। अब
अनुराग काव्य मंजरी

मोती
“मोती” (1987) — प्रेम, वर्षा, स्पर्श और स्मृति के कोमल बिंबों से रचा एक खूबसूरत प्रेम–गीत; जिसमें शब्द मोतियों की तरह पिरो कर उभरते हैं।
Aam Nahin Hai Yeh Rishta Hamara Page 1
आम नहीं है यह रिश्ता हमारा पृष्ठ- 1 आम नहीं हा यह रिश्ता हमारा । मैंने कहा जानती हो तुम भी तो, कि आम नहीं है यह रिश्ता हमारा, खास है। बाहों में है प्रिया मेरी, दिल उसका मेरे पास है। नहीं बदलेगा यह मंज़र कभी, मेरा विश्वास है। वह
Hari Shawl Odhe
हरी शॉल ओढ़े पृष्ठ- 1 “मेरे लिए तो ज़िन्दगी उसी दिन ठहर गई थी तुम मुझे छोड़ के जिस दिन, जिस पहर गई थी। अब भी याद आती हो वही हरी शॉल ओढ़े देख कर मुझे दूर से मुस्कुराती हो और वही मैं शर्माया सा खड़ा हूँ दूर कोने में