झलकियाँ

Abhootpoorv Kavi Page 1

अभूतपूर्व कवि पृष्ठ 1/7 जब मेरी कविता कहने की बारी आई, काफी लोग घर जा चुके थे। जो कुर्सियों पर अटके थे, सुस्ता चुके थे।

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Waiter Miyaan

मैंने सोचा, श्रीमती जी थीं रसोई में –शायद चावल धोने लगीं।जब देर तक कोई हरकत की आवाज़ नहीं आई,तो मैं रसोई में गया, वहाँ नहीं

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