वेटर मियाँ

वेटर मियाँ शादी के कुछ दिन बाद हिम्मत कर मैंने कहा अपनी पत्नी से – आज फिर हो जाए कुछ खाना… वो लजाई, थोड़ा मुस्कुराई, फिर बोली – “फिल्मी कि ग़ैर-फिल्मी?” उत्तर से मैं चौंका, फिर भी शॉक को दबाए बोला – “वही, जो तुम्हारे मन को भाए… आज तो हो ही जाए।” थोड़ा सोचकर, […]

चाय की दुकान

चाय की दुकान ☕   ✍️   📷 चाय की दुकान जब मेरी कविता एक अखबार में छपी, प्रेस रेपोरटर्ज़ (पत्रकार) घर आने लगे, सुबह शाम घर के चक्कर लगाने लगे । पहले-पहल तो मैं फूला न समाता । साक्षात्कार के लिए झट बैठ जाता उन्हें बैठक में बैठाता, चाय पिलाता । इंपोर्टेड सिगरेट पीने […]

अभूतपूर्व कवि

अभूतपूर्व कवि जब मेरी कविता कहने की बारी आई,  काफी लोग घर जा चुके थे।  जो कुर्सियों पर अटके थे, सुस्ता चुके थे।  नींद मुझे भी थी आई,  मैंने ली एक जम्हाई, और कहा,  मेरे जागते और सोते हुए भाईओ। या तो कविता हो ऐसी,  कि दुनिया हंस-हंस के दोहरी हो जाए,  या हो इतनी […]