ईश्वर की पहचान

ईश्वर की पहचान
यूँ चला हत्याओं का दौर कुछ—
ज़िन्दगी घबराने लगी;
धर्म, जाति, कुल, वंश—
सबमें मृत्यु नज़र आने लगी।
मनुष्य, मनुष्यता का
कत्ल कर के
वीर कहलाने लगा;
इंसान को इंसान में
दैत्य नज़र आने लगा।
मेरी आत्मा …
मोती

मोती
(Revised & Polished Version – Navneet Kumar, August 1987)
1.
बिखरे शब्दों के मोती—
पास यदि तुम मेरे होती,
माला पिरोती।
मैं चुन–चुन कर देता मोती
मेरे शब्दों के उर में,
जलती प्रेम की ज्योति।
2.
मोती संजोए जाते,…